Shri Ganesh Chalisa Lyrics - Anuradha Paudwal

किसी भी शुभ कार्य से पहले जिनका स्मरण किया जाता है, विघ्नों को हरने वाले और मंगल करने वाले उन्हीं गणपति बप्पा की महिमा का गान है — श्री गणेश चालीसा। यह चालीसा गणेशजी के जन्म की कथा, उनके रूप-स्वरूप और भक्तों पर उनकी कृपा का सरल, सुंदर वर्णन करती है। श्रद्धा से इसका पाठ करने वाले भक्त को जीवन में विघ्नों से मुक्ति, बुद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है — यही मान्यता पीढ़ियों से चली आ रही है।
🙏 जय गणेश! जय गणेश! जय गणेश देवा! 🐘
🎵 CHALISA DETAILS

Chalisa — Shri Ganesh Chalisa Album Name - Chalisa Sangrah Singer - Anuradha Paudwal Composer - Shekhar Sen Label - T-Series Bhakti Sagar Devata — Shri Ganesh (Ganpati)
Language — Hindi (Avadhi-influenced traditional verse)
Format — Doha–Chaupai (traditional)
Best time to read — Wednesday, Ganesh Chaturthi, before starting any new work

श्री गणेश चालीसा — संपूर्ण पाठ हिंदी, उच्चारण और अर्थ सहित


Shri Ganesh Chalisa - Anuradha Paudwal Hindi English - T-Series

॥ दोहा ॥

जय गणपति सद्गुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
Jai Ganapati sadguna sadana, kaviवर badana kripaala, Vighna harana mangala karana, jai jai Girijaalaala.
अर्थ: हे सद्गुणों के घर गणपति! कवियों के लिए कृपालु मुख वाले! आप विघ्नों को हरने वाले और मंगल करने वाले हैं। हे गिरिजा (पार्वती) के लाल, आपकी जय हो।

॥ गणेश महिमा ॥
चालीसा की शुरुआत ही गणेशजी के दो प्रमुख गुणों से होती है — विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता। यही कारण है कि हर शुभ कार्य से पहले उन्हें स्मरण किया जाता है।
॥ चौपाई ॥

जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥
जै गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥
Jai jai jai Ganapati Ganaraaju, Mangala bharana karana shubha kaaju, Jai gajabadana sadana sukhadaataa, Vishwa Vinaayaka buddhi vidhaataa.
अर्थ: गणों के राजा गणपति की जय हो, जो शुभ कार्यों में मंगल भरते हैं। हाथी के मुख वाले, सुख देने वाले, विश्व के विनायक और बुद्धि के विधाता की जय हो।

वक्रतुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
Vakratunda shuchi shunda suhaavana, Tilaka tripunda bhaala mana bhaavana, Raajata mani muktana ura maalaa, Swarna mukuta shira nayana vishaalaa.
अर्थ: टेढ़ी सूँड वाला मुख अत्यंत सुहावना है, ललाट पर त्रिपुण्ड तिलक मन को भाता है। गले में मणि-मोतियों की माला है, सिर पर स्वर्ण मुकुट और विशाल नेत्र हैं।

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥
Pustaka paani kuthaara trishoolam, Modaka bhoga sugandhita phoolam, Sundara peetaambara tana saajita, Charana paadukaa muni mana raajita.
अर्थ: हाथों में पुस्तक, कुल्हाड़ी और त्रिशूल है, मोदक का भोग और सुगंधित फूल अर्पित हैं। सुंदर पीताम्बर से शरीर सुसज्जित है, चरण-पादुकाएँ मुनियों के मन को भी मोहित करती हैं।

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी लालन विश्व विख्याता॥
ऋद्धि सिद्धि तव चंवर सुधारे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥
Dhani Shiva suvana Shadaanana bhraataa, Gauree laalana vishwa vikhyaataa, Riddhi Siddhi tava chanwara sudhaare, Mooshaka vaahana sohata dwaare.
अर्थ: धन्य हैं शिव-पुत्र, षडानन (कार्तिकेय) के भ्राता, गौरी के लाड़ले, जो विश्व-विख्यात हैं। ऋद्धि और सिद्धि आपका चंवर डुलाती हैं, मूषक वाहन द्वार पर शोभायमान है।

॥ गणेश महिमा ॥
ऋद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (सफलता) को गणेशजी की चंवर डुलाने वाली शक्तियाँ बताया गया है — यही संकेत है कि उनकी कृपा से ही यह दोनों प्राप्त होती हैं।
कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हों भारी॥
Kahaun janma shubha kathaa tumhaaree, Ati shuchi paavana mangalakaaree, Ek samaya Giriraaja kumaaree, Putra hetu tapa keenho bhaaree.
अर्थ: अब मैं आपकी शुभ जन्म-कथा कहता हूँ, जो अत्यंत पावन और मंगलकारी है। एक समय गिरिराज-कुमारी (पार्वती) ने पुत्र प्राप्ति के लिए भारी तप किया।

भयउ यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा॥
अतिथि जानि कै गौरि सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥
Bhayau yagya jaba poorna anoopaa, Taba pahunchyo tuma dhari dwija roopaa, Atithi jaani kai Gauri sukhaaree, Bahu vidhi sevaa karee tumhaaree.
अर्थ: जब यह अनुपम यज्ञ पूर्ण हुआ, तब आप ब्राह्मण का रूप धरकर वहाँ पहुँचे। अतिथि जानकर गौरी ने प्रसन्न होकर आपकी भाँति-भाँति सेवा की।

अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण एहि काला॥
Ati prasanna hvai tuma vara deenhaa, Maatu putra hita jo tapa keenhaa, Milahi putra tuhi buddhi vishaalaa, Binaa garbha dhaarana ehi kaalaa.
अर्थ: अत्यंत प्रसन्न होकर आपने वरदान दिया कि जो तप माता ने पुत्र-प्राप्ति के लिए किया है, उसके फलस्वरूप बिना गर्भ धारण किए ही उसे महाबुद्धिमान पुत्र मिलेगा।

गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप जग जाना॥
अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥
Ganaayaka guna gyaana nidhaanaa, Poojita prathama roop jaga jaanaa, Asa kahi antardhaana roop hvai, Palanaa para baalaka swaroopa hvai.
अर्थ: वह गणनायक, गुण-ज्ञान का भंडार होगा और जगत में सबसे पहले पूजा जाएगा। ऐसा कहकर आप अंतर्धान हो गए, और पालने में बालक के रूप में प्रकट हो गए।

॥ गणेश महिमा ॥
गणेशजी का "प्रथम पूज्य" होना संयोग नहीं — स्वयं शिवजी ने यह वरदान दिया था कि सृष्टि में सबसे पहले उन्हीं की पूजा होगी।
शेष सहस मुख सके न गाई। जो गति यह गणपति की भाई॥
मैं मति हीन मलीन दुखारी। करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
Shesha sahasa mukha sake na gaaee, Jo gati yah Ganapati kee bhaaee, Main mati heena maleena dukhaaree, Karahoon kauna vidhi vinaya tumhaaree.
अर्थ: गणपति की जो महिमा है, उसे शेषनाग भी अपने हज़ार मुखों से पूरी तरह गा नहीं सकते। मैं तो मतिहीन, मलिन और दुखी हूँ — फिर किस विधि से आपकी विनय करूँ।

वारंवार बदउं तव चरणा। हरहु सकल संकट जग हरना॥
अस्तुति करि जो नर तनु धारी। बिघ्नहीन ते होंहि सुखारी॥
Vaaranvaara badaun tava charanaa, Harahu sakala sankata jaga harnaa, Astuti kari jo nara tanu dhaaree, Bighnaheen te honhi sukhaaree.
अर्थ: मैं बार-बार आपके चरणों की वंदना करता हूँ। हे संसार के संकट हरने वाले, मेरे सारे संकट हर लीजिए। जो मनुष्य यह स्तुति करता है, वह विघ्नरहित होकर सुखी हो जाता है।

जो गणेश सम बुद्धि बल पावें। सुयश जगत में अधिक कहावें॥
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। अस कहि तुम्ह जग विदित विख्याता॥
Jo Ganesh sam buddhi bala paaven, Suyash jagat mein adhika kahaaven, Ashta siddhi nava nidhi ke daataa, Asa kahi tumha jaga vidita vikhyaataa.
अर्थ: जो गणेशजी जैसी बुद्धि और बल पाता है, वह जगत में विशेष यश पाता है। आप आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता के रूप में संसार भर में विख्यात हैं।

॥ गणेश महिमा ॥
अष्ट सिद्धि और नव निधि — यानी आठ प्रकार की सिद्धियाँ और नौ प्रकार की संपत्तियाँ — गणेशजी के भक्तों को स्वतः प्राप्त होने वाला वरदान मानी जाती हैं।
चारि वेद षटशास्त्र पुराना। सबमें भेद तुम्हार बखाना॥
व्यास आदि कवि जन जोई कहे। सकल भांति चरित्र तुम गहे॥
Chaari veda shatashaastra puraanaa, Sabamein bheda tumhaara bakhaanaa, Vyaasa aadi kavi jana joi kahe, Sakala bhaanti charitra tuma gahe.
अर्थ: चारों वेद, छह शास्त्र और पुराणों में भी आपका ही महिमा-गान किया गया है। व्यासजी सहित सभी कवियों ने आपके चरित्र का हर भाँति से वर्णन किया है।

॥ दोहा (समापन) ॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करें धरि ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसे, लहै जगत सम्मान॥
Shree Ganesh yah chaalisaa, paatha karein dhari dhyaana, Nita nava mangala griha base, lahai jagat sammaana.
अर्थ: श्री गणेश की यह चालीसा जो ध्यानपूर्वक पढ़ता है, उसके घर में नित्य नया मंगल बसता है और उसे जगत में सम्मान मिलता है।

श्री गणेश चालीसा के लाभ

चालीसा स्वयं बताती है कि श्रद्धापूर्वक पाठ करने वाला विघ्नरहित और सुखी होता है, उसे बुद्धि-बल में गणेशजी जैसी विशेषता प्राप्त होती है, और अष्ट सिद्धि-नव निधि का आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि नए घर, नए व्यापार, विवाह या किसी भी नए कार्य के आरंभ में गणेश चालीसा और गणेश वंदना को सबसे पहले स्थान दिया जाता है।

श्री गणेश चालीसा — Video

Traditional Chalisa Path

निष्कर्ष

श्री गणेश चालीसा केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि गणपति बप्पा की कृपा का वो सरल मार्ग है जो हर भक्त, हर उम्र के व्यक्ति के लिए सुलभ है। इसकी दोहा-चौपाई शैली इसे कंठस्थ करना आसान बनाती है, और इसकी कथा गणेशजी के जन्म से लेकर उनकी महिमा तक का पूरा वर्णन देती है। इसे बुधवार, गणेश चतुर्थी या किसी भी नए कार्य से पहले श्रद्धापूर्वक पढ़ें — और विघ्नहर्ता की कृपा से हर बाधा दूर होगी। इस चालीसा को अपने गणेश भक्त परिवार और मित्रों के साथ ज़रूर share करें। 🙏 जय गणेश! जय गणेश! जय गणेश देवा! 🐘

हर नया भजन सबसे पहले पाएं

लिरिक्स, अर्थ और transliteration — सीधे आपके WhatsApp पर

WhatsApp चैनल जॉइन करें →