Aarti - Deva Brahma Vishnu Mahesh Lyrics | आरती

सृष्टि के तीन महान देव — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — जब एक ही भजन में साथ विराजते हैं, तो वह भजन सृजन, पालन और संहार के संपूर्ण चक्र का दर्शन करा देता है। "ब्रह्मा विष्णु महेश" इसी त्रिमूर्ति की संयुक्त वंदना है, जहाँ हर अंतरा इनमें से एक देव के कार्य और महिमा का वर्णन करता है — ब्रह्मा की सृजन शक्ति, विष्णु का अवतार-धर्म, और शिव का नीलकंठ रूप। Ravindra Sathe, Rattan Mohan Sharma और Sanjeev Abhayankar जैसे शास्त्रीय गायकों की आवाज़ में एल्बम "The Holy Trinity" से यह भजन त्रिमूर्ति की एकता को बड़ी सहजता से समझाता है।
🙏 ब्रह्मा विष्णु महेश! कृपा तुम्हारी हो तो मिटे सारे द्वेष! 🕉️
🎵 SONG DETAILS

Bhajan — Brahma Vishnu Mahesh (Deva Brahma Vishnu Mahesh)
Singers — Ravindra Sathe, Rattan Mohan Sharma & Sanjeev Abhayankar
Language — Hindi
Album — The Holy Trinity
Label — Times Music India

Deva Brahma Vishnu Mahesh Lyrics in Hindi - Aarti

ब्रह्मा विष्णु महेश — Lyrics in Hindi

॥ मुखड़ा ॥

ब्रह्मा विष्णु महेश
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश
कृपा तुम्हारी हो तो
कृपा तुम्हारी हो तो
मिटे सारे द्वेष
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश

॥ त्रिमूर्ति भाव ॥
भजन की मुखड़ा में ही संकल्प स्पष्ट है — त्रिमूर्ति की कृपा हो तो संसार से द्वेष, बैर और वैमनस्य मिट सकते हैं।
॥ अंतरा १ — ब्रह्मा ॥

अपनी सृजन शक्ति से
ब्रह्मा करते जग निर्माण
ब्रह्मा करते जग निर्माण
चतुर्वेद के द्वारा
चतुर्वेद के द्वारा
देते सबको ज्ञान
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश

॥ त्रिमूर्ति भाव ॥
सृष्टिकर्ता ब्रह्मा केवल रचना ही नहीं करते — चारों वेदों के माध्यम से वे संपूर्ण जगत को ज्ञान भी देते हैं।
॥ अंतरा २ — विष्णु ॥

जब जब धर्म की ग्लानि होवे
विष्णु रूप धरें
देवा विष्णु रूप धरें
पालनकर्ता सबका
पालनकर्ता सबका
इससे जगत चले
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश

॥ त्रिमूर्ति भाव ॥
यह पंक्ति सीधे गीता के "यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति" श्लोक की प्रतिध्वनि है — जब भी धर्म पर संकट आता है, विष्णु अवतार लेते हैं।
॥ अंतरा ३ — महेश ॥

शिव ने सागर मंथन से
जो निकला विष वो पिया
जो निकला विष वो पिया
रखने संतुलन जग का
रखने संतुलन जग का
रौद्र स्वरूप लिया
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश

॥ त्रिमूर्ति भाव ॥
समुद्र मंथन में निकला हलाहल विष स्वयं पीकर शिव नीलकंठ बने — यह त्याग जगत के संतुलन के लिए था, अपने लिए नहीं।
॥ अंतरा ४ — त्रिमूर्ति ॥

ब्रह्मा विष्णु और महेश्वर
लीला करते अनेक
लीला करते अनेक
कृपा दृष्टि से इनकी
कृपा दृष्टि से इनकी
मिटे सारे भेद
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश

॥ समापन ॥

ब्रह्मा विष्णु महेश
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश
कृपा तुम्हारी हो तो
कृपा तुम्हारी हो तो
मिटे सारे द्वेष
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश
देवा ब्रह्मा विष्णु महेश

Brahma Vishnu Mahesh — Lyrics in English (Roman)

Brahma Vishnu Mahesh
Deva Brahma Vishnu Mahesh
Kripa Tumhari Ho To
Kripa Tumhari Ho To
Mite Saare Dwesh
Deva Brahma Vishnu Mahesh

Apni Srijan Shakti Se
Brahma Karte Jag Nirmaan
Brahma Karte Jag Nirmaan
Chaturved Ke Dwara
Chaturved Ke Dwara
Dete Sabko Gyaan
Deva Brahma Vishnu Mahesh

Jab Jab Dharm Ki Glaani Hove
Vishnu Roop Dharein
Deva Vishnu Roop Dharein
Paalankarta Sabka
Paalankarta Sabka
Isse Jagat Chale
Deva Brahma Vishnu Mahesh

Shiv Ne Saagar Manthan Se
Jo Nikla Vish Woh Piya
Jo Nikla Vish Woh Piya
Rakhne Santulan Jag Ka
Rakhne Santulan Jag Ka
Raudra Swaroop Liya
Deva Brahma Vishnu Mahesh

Brahma Vishnu Aur Maheshwar
Leela Karte Anek
Leela Karte Anek
Kripa Drishti Se Inki
Kripa Drishti Se Inki
Mite Saare Bhed
Deva Brahma Vishnu Mahesh

Brahma Vishnu Mahesh
Deva Brahma Vishnu Mahesh
Kripa Tumhari Ho To
Kripa Tumhari Ho To
Mite Saare Dwesh
Deva Brahma Vishnu Mahesh
Deva Brahma Vishnu Mahesh
Deva Brahma Vishnu Mahesh

भजन का अर्थ – Brahma Vishnu Mahesh Meaning

"कृपा तुम्हारी हो तो कृपा तुम्हारी हो तो मिटे सारे द्वेष" — भजन की मुखड़ा में ही संकल्प है। त्रिमूर्ति की कृपा से ही संसार से द्वेष, वैमनस्य और बैर मिट सकते हैं — यह केवल व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक कल्याण की प्रार्थना है।

"अपनी सृजन शक्ति से ब्रह्मा करते जग निर्माण, चतुर्वेद के द्वारा देते सबको ज्ञान" — ब्रह्माजी की भूमिका दोहरी है — वे सृष्टि रचते हैं और साथ ही चारों वेदों के माध्यम से ज्ञान भी देते हैं। सृजन के साथ ज्ञान अनिवार्य है, यही इस पंक्ति का भाव है।

"जब जब धर्म की ग्लानि होवे विष्णु रूप धरें, पालनकर्ता सबका इससे जगत चले" — यह पंक्ति सीधे भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक की भावना दोहराती है — जब-जब अधर्म बढ़ता है, विष्णु अवतार लेकर संतुलन बहाल करते हैं। वे ही जगत के पालनकर्ता हैं, इसीलिए सृष्टि सुचारु रूप से चलती है।

"शिव ने सागर मंथन से जो निकला विष वो पिया, रखने संतुलन जग का रौद्र स्वरूप लिया" — समुद्र मंथन में निकले हलाहल विष को स्वयं पीकर शिव नीलकंठ कहलाए। यह बलिदान अपने लिए नहीं, सृष्टि के संतुलन के लिए था — इसीलिए वे रौद्र (उग्र, संहारक) रूप में भी पूजनीय हैं।

"ब्रह्मा विष्णु और महेश्वर लीला करते अनेक, कृपा दृष्टि से इनकी मिटे सारे भेद" — तीनों देव अलग-अलग लीलाएँ रचते हैं, पर जब इनकी कृपा-दृष्टि भक्त पर पड़ती है, तो सृजन-पालन-संहार का भेद मिट जाता है और भक्त इन्हें एक ही परम सत्ता के रूप में देखने लगता है।

ब्रह्मा विष्णु महेश — Video

Ravindra Sathe, Rattan Mohan Sharma & Sanjeev Abhayankar Version

निष्कर्ष

"ब्रह्मा विष्णु महेश" भजन सृष्टि के तीन महान कार्यों — सृजन, पालन और संहार — को एक साथ समझने का सरल और सुंदर माध्यम है। Ravindra Sathe, Rattan Mohan Sharma और Sanjeev Abhayankar के शास्त्रीय स्वरों में इसे सुनना त्रिमूर्ति की एकता को गहराई से महसूस कराता है। इसे प्रतिदिन सुनें, हर देव की भूमिका को मन में उतारें — और जीवन से द्वेष व वैमनस्य अपने आप कम होने लगेंगे। इस भजन को अपने परिवार और भक्त मित्रों के साथ ज़रूर share करें। 🙏 ब्रह्मा विष्णु महेश! कृपा तुम्हारी हो तो मिटे सारे द्वेष! 🕉️

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