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भगवान गणेश जी आरती के शब्द गीत | Lord Ganesha's Aarti Lyrics

भगवान गणेश की आरती उनके प्रभावशाली और प्रिय भक्तों के द्वारा गाई जाने वाली पूजनीय स्तुति है। इस आरती का पाठ करना भक्तों को दिव्य और शांति भरे अनुभव में ले जाता है और उन्हें गणेश जी के सानिध्य से जोड़ने का अद्वितीय अवसर प्रदान करता है। इस आरती के शब्द और सुरों का संगम एक आध्यात्मिक अनुभव का सृजन करता है, जिससे भक्त गणेश जी के प्रति अपनी श्रद्धाभावना को व्यक्त करते हैं और उनकी कृपा को आत्मसात करते हैं। गणेश जी की आरती  हिंदी में जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती प

पवित्र हनुमान आरती लिरिक्स | Aarti Kije Hanuman Lala Ki

आरती कीजै हनुमान लला की: श्रद्धांजलि भवभूति और सुकून आपको एक आध्यात्मिक सफर पर ले जाएं 'आरती कीजै हनुमान लला की' के साथ - श्रद्धांजलि भवभूति और सुकून के लिए। इस भक्तिमय योगदान से हनुमान जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, आप आध्यात्मिक संबंध में श्रद्धा, शांति, और दैहिक जुड़ाव की भावना को जागृत करें। इस भक्ति के तालमेल में आपको श्रद्धा के रूपी संगीत में सुकून की अनुभूति होगी।  हनुमान जी की आरती  आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके। अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए। लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे

[जय अम्बे गौरी] Durga Maa Ki Aarti Lyrics | Aarti Sangrah

दुर्गा माँ, हिन्दू धर्म की प्रमुख देवी, शक्ति की प्रतीक हैं। वह नैराश्य, साहस, और महिलाशक्ति का प्रतीक हैं। उनके अनेक हाथों में हर तरह की शस्त्र होते हैं, जो बुराई को समाप्त करने के लिए हैं। वह सौंदर्य और शौर्य का प्रतीक है, जो अपने भक्तों को सभी प्रकार के परिप्रेक्ष्य से बचाने के लिए तैयार हैं। AI Generated Maa Durga Images दुर्गा माँ आरती लिरिक्स - भक्ति गीतों के शब्द जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी, तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी। ॐ जय अम्बे गौरी… मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को, उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥ ॐ जय अम्बे गौरी… कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै, रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ ॐ जय अम्बे गौरी… केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी, सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी… कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती, कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥ ॐ जय अम्बे गौरी… शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती, धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ ॐ जय अम्बे गौरी… चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे, मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ॐ जय अम्बे गौरी… ब्रह्माणी, रूद्राणी

[ॐ जय लक्ष्मी माता] Om Jai Lakshmi Mata Bhajan Lyrics | Aarti Sangrah

Mata Lakshmi Ji Ki Aarti MP3 Text Lyrics and HD Video माता लक्ष्मी धन सम्पदा की देवी हैं। माँ सब पे क्रिया बनाये रखें। माँ लक्ष्मी की आरती से सब संभव हो जाता है और मन विचलित नहीं होता है। प्रेम से बोलिये माँ महालक्ष्मी जी की जय यहां हम माता लक्ष्मी जी की आरती हिंदी पाठ गीत प्रस्तुत करते हैं AI Generated Maa Lakshmi Images मां लक्ष्‍मी की आरती गीतिकाव्य [ Maa Lakshmi Ki Aarti Lyrics in Hindi ] मां लक्ष्‍मी की आरती मां लक्ष्‍मी की आरती ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम ही जग माता । सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥ दुर्गा रूप निरंजनि, सुख-संपत्ति दाता । जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥ ॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥ तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता । कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,भव निधि की त्राता ॥ ॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥ जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद्‍गुण आता । सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥ ।।ॐ जय लक्ष्मी माता...॥ तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता । खान पान का वैभव, सब तुमसे

Om Jai Jagdish Hare Bhajan Lyrics| Aarti Sangrah

Om Jai Jagdish Arti Bhajan Lyrics: Arti is taken from 'aratrika', a  Sanskrit word  which means something that eliminate ratri, darkness. Aarti is a traditional ritual of Hindu Worship to do Arti at the end of Puja . At the end of every  auspicious Puja, Aarti bhajan sung for god and offering him lamp(arti). Image Courtesy: Youtube.com Bhajan- Om Jai Jagdish Hare Album- Aartiyan Singer- Anuradha Paudwal Music- Arun Paudwal Lyrics- Traditional Music Label:T-Series Satyanarayan Om Jai Jagdish Hare Aarti Bhajan Lyrics English and Hindi Om Jai Jagdish Hare MP3 Bhajan Lyrics