भोर की पहली किरण के साथ जब "हरि सुन्दर नंद मुकुन्द, हरि नारायण हरि ओम" की धुन कानों में पड़ती है — तो मन अनायास ही गोकुल की उन पावन गलियों में पहुँच जाता है जहाँ बनमाली कान्हा अपनी मुरली बजाते हुए गोपियों संग रास रचाते हैं। सोहिनी मिश्रा की कोमल और दिव्य आवाज़ में यह प्रातःकाल भजन Music Nova द्वारा प्रस्तुत है। भगवान श्रीकृष्ण के अनेक नामों — केशव, गोविंद, मुकुन्द, नारायण — से सजा यह भजन दिन की शुरुआत को भक्तिमय बनाने के लिए अद्वितीय है।
"बनमाली मुरलीधारी, गोवर्धन गिरिवरधारी" — बनमाली अर्थात् वनफूलों की माला पहनने वाले कान्हा; मुरलीधारी अर्थात् मुरली बजाने वाले; और गोवर्धन गिरिवरधारी अर्थात् वे जिन्होंने इंद्र के कोप से गोकुलवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया था।
"हे मोरमुकुट गिरधारी, कान्हा पीताम्बरधारी" — मोर के पंख का मुकुट धारण किए और पीले वस्त्र पहने श्रीकृष्ण का यह रूप सबसे प्रिय और पूजित है। पीताम्बर रंग विष्णु तत्व का प्रतीक है और मोर-मुकुट बृज की प्रकृति से कान्हा के प्रेम का।
"आओ रे नाचो रे रास रचाओ रे" — यह पंक्ति शरद पूर्णिमा की उस महारास-लीला का स्मरण कराती है जब कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ रास रचाया था। भक्त उन्हें आमंत्रित करते हैं — आओ, नाचो, रास रचाओ!
🙏 जय श्री कृष्ण! हरि नारायण हरि ओम! 🦚
🎵 SONG DETAILS
भजन का नाम — हरि सुन्दर नंद मुकुन्द, हरि नारायण हरि ओम
Singer — Sohini Mishra (सोहिनी मिश्रा)
Lyrics — Traditional (पारंपरिक)
Label — Music Nova
रिलीज़ — October 2020
देवता — भगवान श्री कृष्ण (नंद नंदन)
थीम — प्रातःकाल भजन | कृष्ण नाम संकीर्तन | गोकुल लीला
भजन का नाम — हरि सुन्दर नंद मुकुन्द, हरि नारायण हरि ओम
Singer — Sohini Mishra (सोहिनी मिश्रा)
Lyrics — Traditional (पारंपरिक)
Label — Music Nova
रिलीज़ — October 2020
देवता — भगवान श्री कृष्ण (नंद नंदन)
थीम — प्रातःकाल भजन | कृष्ण नाम संकीर्तन | गोकुल लीला
हरि सुन्दर नंद मुकुन्द — Lyrics in Hindi
हरि सुन्दर नंद मुकुन्द — Lyrics in Hindi
॥ मुखड़ा ॥
हरि सुन्दर नंद मुकुन्द,
हरि नारायण हरि ओम।
हरि केशव हरि गोविन्द,
हरि नारायण हरि ओम।
हरि सुन्दर नंद मुकुन्द,
हरि नारायण हरि ओम॥
॥ अंतरा १ ॥
बनमाली मुरलीधारी,
गोवर्धन गिरिवरधारी,
नित नित कर माखन चोरी,
गोपी मनहारी।
आओ रे गाओ रे गोकुल के प्यारे,
आओ रे कान्हा रे गोकुल के प्यारे,
आओ रे नाचो रे रास रचाओ रे,
गाओ रे नाचो रे रास रचाओ रे॥
हरि सुन्दर नंद मुकुन्द,
हरि नारायण हरि ओम।
हरि केशव हरि गोविन्द,
हरि नारायण हरि ओम॥
॥ अंतरा २ ॥
हे मोरमुकुट गिरधारी,
कान्हा पीताम्बरधारी,
गोपियन संग रास रचाए,
मोहन मुरलीधारी।
आओ रे आओ रे मोहन गिरधारी,
आओ रे कान्हा रे हे कृष्ण मुरारी,
आओ रे नाचो रे रास रचाओ रे,
गाओ रे नाचो रे रास रचाओ रे॥
हरि सुन्दर नंद मुकुन्द,
हरि नारायण हरि ओम।
हरि केशव हरि गोविन्द,
हरि नारायण हरि ओम॥
Hari Sundar Nand Mukunda — Lyrics in English (Roman / Hinglish)
|| Mukhda ||
Hari Sundar Nand Mukunda,
Hari Naraayan Hari Om.
Hari Keshav Hari Govinda,
Hari Naraayan Hari Om.
Hari Sundar Nand Mukunda,
Hari Naraayan Hari Om.
|| Antara 1 ||
Banmaali Muralidhaari,
Govardhan Giriwardhaari,
Nit Nit Kar Maakhan Chori,
Gopi Manhaaari.
Aao Re Gaao Re Gokul Ke Pyaare,
Aao Re Kanha Re Gokul Ke Pyaare,
Aao Re Nacho Re Raas Rachaao Re,
Gaao Re Nacho Re Raas Rachaao Re.
Hari Sundar Nand Mukunda,
Hari Naraayan Hari Om.
Hari Keshav Hari Govinda,
Hari Naraayan Hari Om.
|| Antara 2 ||
Hey Mormukat Girdhaari,
Kanha Peetaambardhaari,
Gopiyan Sang Raas Rachaaye,
Mohan Muralidhaari.
Aao Re Aao Re Mohan Girdhaari,
Aao Re Kanha Re Hey Krishna Muraari,
Aao Re Nacho Re Raas Rachaao Re,
Gaao Re Nacho Re Raas Rachaao Re.
Hari Sundar Nand Mukunda,
Hari Naraayan Hari Om.
Hari Keshav Hari Govinda,
Hari Naraayan Hari Om.
भजन का अर्थ – Hari Sundar Nand Mukunda Meaning
"हरि सुन्दर नंद मुकुन्द" — इन चार शब्दों में श्रीकृष्ण के चार सुंदर नाम हैं। हरि अर्थात् भक्तों के दुःखों का हरण करने वाले, सुन्दर अर्थात् त्रिभुवन में सबसे सुंदर, नंद अर्थात् नंद बाबा के लाडले पुत्र, और मुकुन्द अर्थात् मोक्ष देने वाले। यह नाम-संकीर्तन प्रातःकाल के पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।"बनमाली मुरलीधारी, गोवर्धन गिरिवरधारी" — बनमाली अर्थात् वनफूलों की माला पहनने वाले कान्हा; मुरलीधारी अर्थात् मुरली बजाने वाले; और गोवर्धन गिरिवरधारी अर्थात् वे जिन्होंने इंद्र के कोप से गोकुलवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया था।
"हे मोरमुकुट गिरधारी, कान्हा पीताम्बरधारी" — मोर के पंख का मुकुट धारण किए और पीले वस्त्र पहने श्रीकृष्ण का यह रूप सबसे प्रिय और पूजित है। पीताम्बर रंग विष्णु तत्व का प्रतीक है और मोर-मुकुट बृज की प्रकृति से कान्हा के प्रेम का।
"आओ रे नाचो रे रास रचाओ रे" — यह पंक्ति शरद पूर्णिमा की उस महारास-लीला का स्मरण कराती है जब कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ रास रचाया था। भक्त उन्हें आमंत्रित करते हैं — आओ, नाचो, रास रचाओ!
🦚 और कृष्ण भजन पढ़ें
कृष्ण भजन → संपूर्ण आरती संग्रह देखें → प्रातःकाल भजन → 🏠 मुख्य पृष्ठ →
हरि सुन्दर नंद मुकुन्द — Sohini Mishra | Morning Krishna Bhajan
निष्कर्ष
सोहिनी मिश्रा की मधुर आवाज़ में "हरि सुन्दर नंद मुकुन्द" एक ऐसा भजन है जो प्रातःकाल सुनते ही दिन की शुरुआत दिव्य और आनंदमयी हो जाती है। भगवान श्रीकृष्ण के पवित्र नामों का यह संकीर्तन — हरि, केशव, गोविंद, मुकुन्द, नारायण — मन की सभी अशांति को दूर कर भक्ति का रंग चढ़ा देता है। इसे आज अपने परिवार और कृष्ण भक्त मित्रों के साथ ज़रूर share करें। 🙏 जय श्री कृष्ण! हरि नारायण हरि ओम! 🦚हर नया भजन सबसे पहले पाएं
लिरिक्स, अर्थ और transliteration — सीधे आपके WhatsApp पर
WhatsApp चैनल जॉइन करें →