Prarthna Hai Yahi Meri Hanuman Ji | Prakash Gandhi

हनुमान जयंती और संकटमोचन की आराधना के हर अवसर पर गूँजने वाला एक अत्यंत मार्मिक भजन है "प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी"। दिग्गज भजन गायक Prakash Gandhi की भावुक आवाज़ में गाया गया यह भजन किसी कथा या स्तुति की तरह नहीं, बल्कि एक सच्चे भक्त की सीधी-सादी, आत्मस्वीकृति से भरी प्रार्थना की तरह है — जिसमें भक्त अपनी कमज़ोरियों को स्वीकार करते हुए बजरंगबली से कृपा और मार्गदर्शन माँगता है।
🚩 जय बजरंगबली! जय श्री राम! 🙏
🎵 SONG DETAILS

Bhajan — Prarthna Hai Yahi Meri Hanuman Ji
Singer — Prakash Gandhi
Music — Gandhi Brothers (Prakash-Subhash Gandhi)
Label — Power Music Company
Occasion — Hanuman Jayanti, मंगलवार-शनिवार पूजा

Prarthna hai yahi meri Hanuman ji Bhajan

भजन का भाव — प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी

यह भजन एक सच्चे भक्त की आत्म-निरीक्षण से भरी प्रार्थना है, जिसमें वह अपनी कमियों को छुपाए बिना हनुमान जी के सामने रखता है:

1. आशीर्वाद की पहली पुकार:
भजन की शुरुआत में भक्त बस इतना ही माँगता है कि हनुमान जी उसके सिर पर अपना हाथ रख दें, और उसे राम-सीता के दर्शन कराकर उसके सपनों को साकार करें — यह भाव दिखाता है कि भक्त के लिए भौतिक सुख नहीं, बल्कि प्रभु का दर्शन ही सबसे बड़ी कामना है।

2. अपने ही पापों की स्वीकृति:
भक्त स्पष्ट रूप से स्वीकार करता है कि उसके दुखों का कारण कोई और नहीं, बल्कि उसके अपने ही कर्म हैं। वह हनुमान जी को "हर रूप" यानी सर्वव्यापी मानते हुए हर संकट हरने की विनती करता है — यह सच्ची भक्ति की पहचान है, जहाँ भक्त पहले खुद की जिम्मेदारी लेता है।

3. भावुकता और भक्ति में फर्क:
सबसे मार्मिक पंक्तियों में से एक में भक्त कहता है — "मैं भावुक तो हूँ पर नहीं भक्त हूँ, इसी कारण तो विषयों में आसक्त हूँ।" यह स्वीकारोक्ति दिखाती है कि केवल भावुक होना भक्ति नहीं है; असली भक्ति के लिए वासनाओं से मुक्त होकर राम-सीता की भक्ति में मन लगाना ज़रूरी है।

4. सांसारिक और आध्यात्मिक संतुलन की कामना:
भक्त तन के निरोगी रहने, धन-समृद्धि, कर्ज़ और रोग से मुक्ति, तथा हर कर्तव्य निभाने की शक्ति माँगता है — पर साथ ही मन को भजन में स्थिर रखने का वर भी माँगता है। यह दिखाता है कि यह भजन सांसारिक जीवन और आध्यात्मिक साधना, दोनों के संतुलन की प्रार्थना करता है।

5. राम-कथा में लीन होने की अंतिम कामना:
भजन के अंत में भक्त की सबसे गहरी इच्छा सामने आती है — चाहे वह कथा कहे या भक्ति करे, हर जगह उसे सियाराम ही दिखें, और उसकी दृष्टि में वही दिव्य असर भर जाए। यही भक्ति की चरम अवस्था है, जहाँ भक्त और भगवान के बीच कोई भेद नहीं रह जाता।

प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी — Hindi Lyrics

प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी,
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए,
राम सीता का दर्शन कराके मुझे,
मेरे सपने को साकार कर दीजिए,
प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी,
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए॥

दुःख देते मुझे मेरे ही पाप है,
मेरे मन में है क्या जानते आप है,
आप हर रुप है इसलिए कर कृपा,
मेरी हर एक संकट को हर लिजिए,
प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी,
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए॥

मैं भावुक तो हूँ पर नहीं भक्त हूँ,
इसी कारण तो विषयों में आसक्त हूँ,
वासना मुक्त कर मेरे मन को प्रभु,
राम सीता की भक्ति से भर दीजिए,
प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी,
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए॥

तन निरोगी रहे धन भी भरपूर हो,
मन भजन में रहे द्वंद्व दुःख दूर हो,
कर्ज भी न रहे मर्ज भी न रहे,
फर्ज निभता रहे ऐसा वर दीजिए,
प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी,
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए॥

मैं कथा भी कहूँ तो सियाराम की,
मैं भगति भी करूँ तो सियाराम की,
सृष्टि राजेश दिखें सियाराममय,
दास की दृष्टि में वो असर दीजिए,
प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी,
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए॥

Prarthna Hai Yahi Meri Hanuman Ji — English / Hinglish Lyrics

Prarthna hai yahi meri Hanuman ji,
Mere sir par bhi ab haath dhar dijiye,
Ram Sita ka darshan karake mujhe,
Mere sapne ko sakar kar dijiye,
Prarthna hai yahi meri Hanuman ji,
Mere sir par bhi ab haath dhar dijiye॥

Dukh dete mujhe mere hi paap hai,
Mere man mein hai kya jaante aap hai,
Aap har roop hai isliye kar kripa,
Meri har ek sankat ko har lijiye,
Prarthna hai yahi meri Hanuman ji,
Mere sir par bhi ab haath dhar dijiye॥

Main bhavuk to hoon par nahi bhakt hoon,
Isi karan to vishayon mein aasakt hoon,
Vasana mukt kar mere man ko prabhu,
Ram Sita ki bhakti se bhar dijiye,
Prarthna hai yahi meri Hanuman ji,
Mere sir par bhi ab haath dhar dijiye॥

Tan nirogi rahe dhan bhi bharpoor ho,
Man bhajan mein rahe dwandwa dukh door ho,
Karz bhi na rahe marz bhi na rahe,
Farz nibhata rahe aisa var dijiye,
Prarthna hai yahi meri Hanuman ji,
Mere sir par bhi ab haath dhar dijiye॥

Main katha bhi kahoon to Siyaram ki,
Main bhagti bhi karoon to Siyaram ki,
Srishti rajesh dikhein Siyaram-may,
Das ki drishti mein wo asar dijiye,
Prarthna hai yahi meri Hanuman ji,
Mere sir par bhi ab haath dhar dijiye॥

क्या आप जानते हैं? — इस भजन से जुड़े रोचक तथ्य

प्रार्थना, स्तुति नहीं: अधिकतर हनुमान भजन उनकी शक्ति और वीरता का गुणगान करते हैं, लेकिन यह भजन पूरी तरह एक आत्म-स्वीकृति भरी प्रार्थना है — भक्त अपनी कमज़ोरियों को छुपाता नहीं, बल्कि खुलकर स्वीकार करता है। यही इस भजन को बाकी हनुमान भजनों से अलग बनाता है।

भावुकता बनाम भक्ति का संदेश: "मैं भावुक तो हूँ पर नहीं भक्त हूँ" पंक्ति एक गहरा आध्यात्मिक सत्य बताती है — भावनाओं में बह जाना अलग बात है, और सच्ची भक्ति में मन को विषय-वासनाओं से मुक्त करना अलग। यह भजन इसी फर्क को बहुत सरल भाषा में समझाता है।

गांधी ब्रदर्स की विरासत: Prakash Gandhi और उनके भाई Subhash Gandhi का नाम हिंदी भजन संगीत में दशकों से जाना-पहचाना है। इस भजन का संगीत भी इसी जोड़ी ने रचा है, जिनकी धुनें आसानी से याद रह जाने वाली और भाव-प्रधान होने के लिए जानी जाती हैं।

हनुमान जयंती पर विशेष प्रासंगिकता: यह भजन विशेष रूप से हनुमान जयंती के अवसर पर बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि इसमें केवल संकट से मुक्ति ही नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, कर्तव्य-पालन और राम-भक्ति में स्थिरता की सम्पूर्ण कामना समाहित है।

प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी — Video

Prakash Gandhi Version (Hanuman Jayanti Special)

निष्कर्ष

Prakash Gandhi की आवाज़ में "प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी" केवल एक भजन नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन से भरी एक सच्ची प्रार्थना है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति के लिए पहले अपनी कमज़ोरियों को स्वीकार करना पड़ता है, फिर बजरंगबली की कृपा अपने आप बरसती है। इसे सुनें, हृदय से गाएं, और इस भावपूर्ण भजन को अपने सभी हनुमान-भक्त परिजनों व मित्रों के साथ साझा करें। 🚩 जय बजरंगबली! जय श्री राम! 🙏