जीवन जब भंवर में फंसी नाव जैसा लगने लगे, तब बस एक ही पुकार बचती है — "चले आओ मोहन"। Rohit Tiwari Baba की भावभीनी आवाज़ में यह कृष्ण भजन एक भक्त की उस विनती को शब्द देता है जो अपने कृष्ण से बस इतना चाहता है कि वे उसकी अर्जी पर थोड़ा ध्यान दे दें। Sanyog Shrivastav के लिखे बोलों के साथ "भंवर में नाव है मोहन" भजन-प्रेमियों के बीच अपनी सादगी और गहरी भक्ति-भावना के लिए खासा पसंद किया जा रहा है।
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Prabhu is bhakt ki arzi pe thoda dhyan de jaao..
Prabhu is bhakt ki arzi pe thoda dhyan de jaao..
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Dekh main tera pujari tujhpe jaun balihari
Umar jo beeti ab tak ye bhi hai daya tumhari..
Dekh main tera pujari tujhpe jaun balihari
Umar jo beeti ab tak ye bhi hai daya tumhari..
Dayalu apni daya ka zara sa maan de jaao
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Doobti naiya ka to sada hi Shyam sahara
Bachate laaj ho uska jisne tera naam pukara..
Doobti naiya ka to sada hi Shyam sahara
Bachate laaj ho uska jisne tera naam pukara..
Bhakt tera na haare prabhu isko jeeta jaao
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Jag ki bigdi ko banate poora karte har sapna
Maaf kar do naadani bana lo mujhko apna
Jag ki bigdi ko banate poora karte har sapna
Maaf kar do naadani bana lo mujhko apna
Kahen Sanyog he Kanha bhakti ka daan de jaao
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
भजन आगे भक्त के उस भाव को दर्शाता है जहां वह स्वयं को कृष्ण का पुजारी मानते हुए उन पर बलिहारी जाता है। उम्र जो अब तक बीती है, उसे भी वह प्रभु की ही दया मानता है — यानी जीवन का हर पल, चाहे सुख हो या दुख, भक्त उसे भगवान की कृपा के रूप में स्वीकार करता है। अंत में भक्त दयालु प्रभु से बस इतनी विनती करता है कि वे अपनी दया का थोड़ा-सा मान भी दे दें, ताकि भंवर में फंसी उसकी नाव पार लग सके।
सरल और विनम्र विनती: भक्त कुछ बड़ा नहीं मांगता — बस इतना चाहता है कि प्रभु उसकी अर्जी पर थोड़ा ध्यान दे दें।
जीवन को कृपा मानना: बीती हुई उम्र को भी भक्त भगवान की दया मानता है, यानी हर पल को कृतज्ञता से देखता है।
दया का मान: अंत में भक्त दयालु प्रभु से उनकी अपार दया का बस एक छोटा-सा हिस्सा माँगता है।
🙏 चले आओ मोहन! राधे कृष्णा! 🦚
🎵 SONG DETAILS
Bhajan — Chale Aao Mohan (Bhanwar Me Naav)
Singer & Music — Rohit Tiwari Baba
Lyrics — Sanyog Shrivastav
Category — Shree Krishna Bhajan
Bhajan — Chale Aao Mohan (Bhanwar Me Naav)
Singer & Music — Rohit Tiwari Baba
Lyrics — Sanyog Shrivastav
Category — Shree Krishna Bhajan
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आव — Lyrics in Hindi
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
प्रभु इस भक्त की अर्जी पे थोड़ा ध्यान दें जावो।।
प्रभु इस भक्त की अर्जी पे थोड़ा ध्यान दें जावो।।
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
देख मैं तेरा पुजारी तुझपे जाउँ बलिहारी
उमर जो बीती अब तक ये भी है दया तुम्हारी।।
देख मैं तेरा पुजारी तुझपे जाउँ बलिहारी
उमर जो बीती अब तक ये भी है दया तुम्हारी।।
दयालु अपनी दया का ज़रा सा मान दे जावो
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
डूबती नैया का तो सदा ही श्याम सहारा
बचाते लाज हो उसका जिसने तेरा नाम पुकारा।।
डूबती नैया का तो सदा ही श्याम सहारा
बचाते लाज हो उसका जिसने तेरा नाम पुकारा।।
भक्त तेरा ना हारे प्रभु इसको जीता जावो
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
जग की बिगड़ी को बनाते पूरा करते हर सपना
माफ कर दो नादानी बना लो मुझको अपना
जग की बिगड़ी को बनाते पूरा करते हर सपना
माफ कर दो नादानी बना लो मुझको अपना
कहें संयोग हे कान्हा भक्ति का दान दे जावो
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
प्रभु इस भक्त की अर्जी पे थोड़ा ध्यान दें जावो।।
प्रभु इस भक्त की अर्जी पे थोड़ा ध्यान दें जावो।।
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
देख मैं तेरा पुजारी तुझपे जाउँ बलिहारी
उमर जो बीती अब तक ये भी है दया तुम्हारी।।
देख मैं तेरा पुजारी तुझपे जाउँ बलिहारी
उमर जो बीती अब तक ये भी है दया तुम्हारी।।
दयालु अपनी दया का ज़रा सा मान दे जावो
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
डूबती नैया का तो सदा ही श्याम सहारा
बचाते लाज हो उसका जिसने तेरा नाम पुकारा।।
डूबती नैया का तो सदा ही श्याम सहारा
बचाते लाज हो उसका जिसने तेरा नाम पुकारा।।
भक्त तेरा ना हारे प्रभु इसको जीता जावो
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
जग की बिगड़ी को बनाते पूरा करते हर सपना
माफ कर दो नादानी बना लो मुझको अपना
जग की बिगड़ी को बनाते पूरा करते हर सपना
माफ कर दो नादानी बना लो मुझको अपना
कहें संयोग हे कान्हा भक्ति का दान दे जावो
भवर में नाव है मोहन कंहा हो तुम चले आवो
Teri maya ka Bhajan English Text Lyrics
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Prabhu is bhakt ki arzi pe thoda dhyan de jaao..
Prabhu is bhakt ki arzi pe thoda dhyan de jaao..
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Dekh main tera pujari tujhpe jaun balihari
Umar jo beeti ab tak ye bhi hai daya tumhari..
Dekh main tera pujari tujhpe jaun balihari
Umar jo beeti ab tak ye bhi hai daya tumhari..
Dayalu apni daya ka zara sa maan de jaao
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Doobti naiya ka to sada hi Shyam sahara
Bachate laaj ho uska jisne tera naam pukara..
Doobti naiya ka to sada hi Shyam sahara
Bachate laaj ho uska jisne tera naam pukara..
Bhakt tera na haare prabhu isko jeeta jaao
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
Jag ki bigdi ko banate poora karte har sapna
Maaf kar do naadani bana lo mujhko apna
Jag ki bigdi ko banate poora karte har sapna
Maaf kar do naadani bana lo mujhko apna
Kahen Sanyog he Kanha bhakti ka daan de jaao
Bhawar mein naav hai Mohan kahan ho tum chale aao
भजन का भाव — चले आओ मोहन
भजन की शुरुआत ही एक गहरी व्याकुलता से होती है — भक्त की जीवन-नाव मानो भंवर में फंसी हो, और वह अपने मोहन से पुकार रहा है कि वे कहां हैं, चले आओ। यह भंवर केवल शब्दों की उपमा नहीं, बल्कि जीवन की उन कठिनाइयों का प्रतीक है जिनमें भक्त बिना कृष्ण की कृपा के डूबता हुआ महसूस करता है। भजन में भक्त बस इतनी विनती करता है कि प्रभु उसकी अर्जी पर थोड़ा ध्यान दे दें — यह विनम्रता और सरलता ही इस भजन को इतना आत्मीय बनाती है।भजन आगे भक्त के उस भाव को दर्शाता है जहां वह स्वयं को कृष्ण का पुजारी मानते हुए उन पर बलिहारी जाता है। उम्र जो अब तक बीती है, उसे भी वह प्रभु की ही दया मानता है — यानी जीवन का हर पल, चाहे सुख हो या दुख, भक्त उसे भगवान की कृपा के रूप में स्वीकार करता है। अंत में भक्त दयालु प्रभु से बस इतनी विनती करता है कि वे अपनी दया का थोड़ा-सा मान भी दे दें, ताकि भंवर में फंसी उसकी नाव पार लग सके।
भजन के मुख्य भाव — एक नज़र में
भंवर में फंसी नाव: जीवन की कठिनाइयों को भंवर में फंसी नाव के रूप में दर्शाते हुए भक्त कृष्ण को पुकारता है।सरल और विनम्र विनती: भक्त कुछ बड़ा नहीं मांगता — बस इतना चाहता है कि प्रभु उसकी अर्जी पर थोड़ा ध्यान दे दें।
जीवन को कृपा मानना: बीती हुई उम्र को भी भक्त भगवान की दया मानता है, यानी हर पल को कृतज्ञता से देखता है।
दया का मान: अंत में भक्त दयालु प्रभु से उनकी अपार दया का बस एक छोटा-सा हिस्सा माँगता है।
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चले आओ मोहन — Video
Rohit Tiwari Baba Version