जब जीवन के हर रास्ते उलझे हों, जब मन शांति ढूंढ रहा हो — तब बस एक ही नाम काफी है — "आशुतोष शशांक शेखर..." Sonu Nigam की गंभीर, भावप्रवण आवाज़ में गाई यह शिव स्तुति भोलेनाथ के अनगिनत रूपों और नामों का वो पावन संगम है जो सदियों से भक्तों के कंठ में बसा है। Nikhil-Vinay के संगीत के साथ यह स्तुति भगवान शिव को उनके सरलतम और सबसे विराट, दोनों ही रूपों में नमन करती है — वो देव जो एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं, और वही सृष्टि, स्थिति और प्रलय के कर्ता भी हैं।
"निर्विकार ओंकार अविनाशी, तुम्ही देवादि देव" — शिव को निर्विकार यानी अपरिवर्तनशील और अविनाशी कहा गया है। वे ओंकार के मूल स्वरूप हैं — सृष्टि की वो ध्वनि जिससे संपूर्ण जगत का आरंभ हुआ।
"जगत सर्जक प्रलय कर्ता, शिवम् सत्यम् सुंदरा" — शिव ही सृष्टि के रचयिता हैं और वही उसके संहारक भी। यह विरोधाभास नहीं, बल्कि सृष्टि के चक्र की सच्चाई है — जो शिवम् है, वही सत्यम् और सुंदरम् भी है।
"शूलपाणि त्रिशूलधारी, औघड़ी बागांबरी" — त्रिशूलधारी शिव की वैरागी छवि — भस्म-भूषित, सरल, फिर भी संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी। यह पंक्ति उनके योगी और ईश्वर, दोनों रूपों को एक साथ दर्शाती है।
"ॐ नमः शिवाय मन जपता रहे पंचाक्षरा" — स्तुति का सार इसी पंक्ति में है। पंचाक्षर मंत्र का निरंतर स्मरण ही वो साधना है जो जन्म-जन्मांतर के संताप को मिटा सकती है।
🕉️ हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय! 🔱
🎵 SONG DETAILS
Stuti — Ashutosh Shashank Shekhar
Singer — Sonu Nigam
Music — Nikhil-Vinay
Lyrics — Traditional (based on ancient Shiva stutis)
Album — Shiv Mahapuran
Stuti — Ashutosh Shashank Shekhar
Singer — Sonu Nigam
Music — Nikhil-Vinay
Lyrics — Traditional (based on ancient Shiva stutis)
Album — Shiv Mahapuran
आशुतोष शशांक शेखर — Lyrics in Hindi
॥ मुखड़ा ॥
आशुतोष शशांक शेखर
चंद्रमौली चिदंबरा
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू
कोटि नमन दिगंबरा ॥
निर्विकार ओंकार अविनाशी
तुम्ही देवादि देव
जगत सर्जक प्रलय कर्ता
शिवम् सत्यम् सुंदरा ॥
निराकार स्वरूप कालेश्वर
महायोगीश्वरा
दयानिधि दानिश्वर जय
जटाधर अभयंकरा ॥
शूलपाणि त्रिशूलधारी
औघड़ी बागांबरी
जय महेश त्रिलोचनाय
विश्वनाथ विशंभरा ॥
नाथ नागेश्वर हरो हर
पाप शाप अभिशाप तम
महादेव महान भोले
सदा शिव शिव शंकरा ॥
जगत पति अनुरक्ति भक्ति
सदैव तेरे चरण हो
क्षमा हो अपराध सब
जय जयति जगदीश्वरा ॥
जनम जीवन जगत का
संताप ताप मिटे सभी
ॐ नमः शिवाय मन
जपता रहे पंचाक्षरा ॥
आशुतोष शशांक शेखर
चंद्रमौली चिदंबरा
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू
कोटि नमन दिगंबरा ॥
कोटि नमन दिगंबरा... कोटि नमन दिगंबरा... कोटि नमन दिगंबरा...
आशुतोष शशांक शेखर
चंद्रमौली चिदंबरा
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू
कोटि नमन दिगंबरा ॥
॥ शिव महिमा ॥
शिव को आशुतोष कहा गया है — अर्थात वो देव जो सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं, बस एक सच्चे हृदय की भेंट चाहिए।
॥ श्लोक १ ॥शिव को आशुतोष कहा गया है — अर्थात वो देव जो सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं, बस एक सच्चे हृदय की भेंट चाहिए।
निर्विकार ओंकार अविनाशी
तुम्ही देवादि देव
जगत सर्जक प्रलय कर्ता
शिवम् सत्यम् सुंदरा ॥
निराकार स्वरूप कालेश्वर
महायोगीश्वरा
दयानिधि दानिश्वर जय
जटाधर अभयंकरा ॥
॥ शिव महिमा ॥
ओंकार की ध्वनि शिव के डमरू से उत्पन्न मानी जाती है — वे ही सृष्टि, पालन और संहार, तीनों के मूल हैं।
॥ श्लोक २ ॥ओंकार की ध्वनि शिव के डमरू से उत्पन्न मानी जाती है — वे ही सृष्टि, पालन और संहार, तीनों के मूल हैं।
शूलपाणि त्रिशूलधारी
औघड़ी बागांबरी
जय महेश त्रिलोचनाय
विश्वनाथ विशंभरा ॥
नाथ नागेश्वर हरो हर
पाप शाप अभिशाप तम
महादेव महान भोले
सदा शिव शिव शंकरा ॥
॥ शिव महिमा ॥
त्रिशूल, नागों की माला और भस्म-भूषित काया — शिव का हर रूप यही सिखाता है कि सच्ची शक्ति दिखावे में नहीं, वैराग्य में है।
॥ श्लोक ३ ॥त्रिशूल, नागों की माला और भस्म-भूषित काया — शिव का हर रूप यही सिखाता है कि सच्ची शक्ति दिखावे में नहीं, वैराग्य में है।
जगत पति अनुरक्ति भक्ति
सदैव तेरे चरण हो
क्षमा हो अपराध सब
जय जयति जगदीश्वरा ॥
जनम जीवन जगत का
संताप ताप मिटे सभी
ॐ नमः शिवाय मन
जपता रहे पंचाक्षरा ॥
॥ शिव महिमा ॥
पंचाक्षर मंत्र — "नमः शिवाय" — का निरंतर जाप ही इस स्तुति का सार है, जन्म-जन्म के ताप को शांत करने वाला।
॥ समापन ॥पंचाक्षर मंत्र — "नमः शिवाय" — का निरंतर जाप ही इस स्तुति का सार है, जन्म-जन्म के ताप को शांत करने वाला।
आशुतोष शशांक शेखर
चंद्रमौली चिदंबरा
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू
कोटि नमन दिगंबरा ॥
कोटि नमन दिगंबरा... कोटि नमन दिगंबरा... कोटि नमन दिगंबरा...
Ashutosh Shashank Shekhar — Lyrics in English (Roman)
Ashutosh Shashank Shekhar
Chandramauli Chidambara
Koti Koti Pranam Shambhu
Koti Naman Digambara ॥
Nirvikar Omkar Avinashi
Tumhi Devadhi Dev
Jagat Sarjak Pralay Karta
Shivam Satyam Sundara ॥
Nirankar Swaroop Kaleshwar
Maha Yogeeshwara
Dayanidhi Danishwar Jay
Jatadhar Abhayankara ॥
Shool Pani Trishul Dhari
Augadi Baghambari
Jay Mahesh Trilochanaya
Vishwanath Vishambhara ॥
Nath Nageshwar Haro Har
Paap Saap Abhishaap Tam
Mahadev Mahan Bhole
Sada Shiv Shiv Shankara ॥
Jagat Pati Anurakti Bhakti
Sadaiv Tere Charan Ho
Kshama Ho Aparadh Sab
Jay Jayati Jagadishwara ॥
Janam Jeevan Jagat Ka
Santaap Taap Mite Sabhi
Om Namah Shivaay Man
Japta Rahe Panchakshara ॥
Ashutosh Shashank Shekhar
Chandramauli Chidambara
Koti Koti Pranam Shambhu
Koti Naman Digambara ॥
Koti Naman Digambara... Koti Naman Digambara... Koti Naman Digambara...
Chandramauli Chidambara
Koti Koti Pranam Shambhu
Koti Naman Digambara ॥
Nirvikar Omkar Avinashi
Tumhi Devadhi Dev
Jagat Sarjak Pralay Karta
Shivam Satyam Sundara ॥
Nirankar Swaroop Kaleshwar
Maha Yogeeshwara
Dayanidhi Danishwar Jay
Jatadhar Abhayankara ॥
Shool Pani Trishul Dhari
Augadi Baghambari
Jay Mahesh Trilochanaya
Vishwanath Vishambhara ॥
Nath Nageshwar Haro Har
Paap Saap Abhishaap Tam
Mahadev Mahan Bhole
Sada Shiv Shiv Shankara ॥
Jagat Pati Anurakti Bhakti
Sadaiv Tere Charan Ho
Kshama Ho Aparadh Sab
Jay Jayati Jagadishwara ॥
Janam Jeevan Jagat Ka
Santaap Taap Mite Sabhi
Om Namah Shivaay Man
Japta Rahe Panchakshara ॥
Ashutosh Shashank Shekhar
Chandramauli Chidambara
Koti Koti Pranam Shambhu
Koti Naman Digambara ॥
Koti Naman Digambara... Koti Naman Digambara... Koti Naman Digambara...
स्तुति का अर्थ – Ashutosh Shashank Shekhar Meaning
"आशुतोष शशांक शेखर, चंद्रमौली चिदंबरा" — आशुतोष यानी सहज ही प्रसन्न होने वाले देव, शशांक शेखर यानी जिनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है। चिदंबरा का अर्थ है — असीम चेतना, वो अनंत आकाश जिसमें समस्त सृष्टि समाई हुई है।"निर्विकार ओंकार अविनाशी, तुम्ही देवादि देव" — शिव को निर्विकार यानी अपरिवर्तनशील और अविनाशी कहा गया है। वे ओंकार के मूल स्वरूप हैं — सृष्टि की वो ध्वनि जिससे संपूर्ण जगत का आरंभ हुआ।
"जगत सर्जक प्रलय कर्ता, शिवम् सत्यम् सुंदरा" — शिव ही सृष्टि के रचयिता हैं और वही उसके संहारक भी। यह विरोधाभास नहीं, बल्कि सृष्टि के चक्र की सच्चाई है — जो शिवम् है, वही सत्यम् और सुंदरम् भी है।
"शूलपाणि त्रिशूलधारी, औघड़ी बागांबरी" — त्रिशूलधारी शिव की वैरागी छवि — भस्म-भूषित, सरल, फिर भी संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी। यह पंक्ति उनके योगी और ईश्वर, दोनों रूपों को एक साथ दर्शाती है।
"ॐ नमः शिवाय मन जपता रहे पंचाक्षरा" — स्तुति का सार इसी पंक्ति में है। पंचाक्षर मंत्र का निरंतर स्मरण ही वो साधना है जो जन्म-जन्मांतर के संताप को मिटा सकती है।
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आशुतोष शशांक शेखर — Video
Sonu Nigam Version