शिव चालीसा — भगवान भोलेनाथ की स्तुति में रची गई वह पावन वंदना है जिसे प्रतिदिन सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से पाठ करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अश्वनी अमरनाथ की दिव्य और भावपूर्ण आवाज़ में यह शिव चालीसा सुनते ही मन अनायास ही महादेव के चरणों में झुक जाता है। यह चालीसा T-Series के एल्बम "जय गिरिजापति दीनदयाला" का हिस्सा है। "जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान, कहत अयोध्यादास तुम, देउ अभय वरदान।"
"नीलकंठ तब नाम कहाई" — समुद्र मंथन में निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने स्वयं पीकर देवताओं और असुरों की रक्षा की। विष कंठ में ही रोक लेने से उनका कंठ नीला पड़ गया और तभी से वे "नीलकंठ" कहलाए। यह प्रसंग उनकी असीम करुणा और त्याग का प्रतीक है।
"जो यह पाठ करे मन लाई, ता पर होत हैं शम्भु सहाई" — शिव चालीसा का यह फल-श्रुति वाला छंद बताता है कि जो भी भक्त मन लगाकर इस चालीसा का पाठ करता है, उस पर भगवान शंकर की विशेष कृपा होती है।
"त्रयोदशी व्रत करे हमेशा, तन नहीं ताके रहे कलेशा" — प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) के दिन शिव चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन नियमित पाठ करने वाले भक्त के शरीर और मन से सभी कष्ट दूर होते हैं।
🙏 हर हर महादेव! जय भोलेनाथ! 🔱
🎵 SONG DETAILS
भजन का नाम — शिव चालीसा (Shiv Chalisa)
Album — Jai Girijapati Deendayala
Singer — Ashwani Amarnath (अश्वनी अमरनाथ)
Lyrics — Traditional (पारंपरिक)
Music Director — Ravi Bhan
Label — T-Series
देवता — भगवान शिव (महादेव)
थीम — शिव स्तुति | दैनिक पूजा पाठ | मनोकामना पूर्ति
भजन का नाम — शिव चालीसा (Shiv Chalisa)
Album — Jai Girijapati Deendayala
Singer — Ashwani Amarnath (अश्वनी अमरनाथ)
Lyrics — Traditional (पारंपरिक)
Music Director — Ravi Bhan
Label — T-Series
देवता — भगवान शिव (महादेव)
थीम — शिव स्तुति | दैनिक पूजा पाठ | मनोकामना पूर्ति
शिव चालीसा — Lyrics in Hindi
शिव चालीसा — Lyrics in Hindi
॥ दोहा ॥
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
॥ चालीसा ॥
जय गिरिजापति दीन दयाला।
सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके।
कानन कुंडल नाग फनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये।
मुण्डमाल तन क्षार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।
छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायो।
लव निमेष महँ मारि गिरायो॥
आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर संग युद्ध मचायी।
सबहिं कृपा कर लीन बचायी॥
किया तप भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कौ नाहीं।
सेवक अस्तुति करत सदाहीं॥
वेद माहि महिमा तुम गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पायी॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहँ करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तब हिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहन सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट ते मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत हैं शम्भु सहाई॥
ऋणिया जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र होन की इच्छा जोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पंडित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।
ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावें।
अन्त धाम शिवपुर में पावें॥
॥ दोहा ॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।
जानी सकल दुख हरहु हमारी॥
Shiv Chalisa — Lyrics in English (Roman / Hinglish)
|| Doha ||
Jai Ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujan.
Kahat Ayodhyadas Tum, Dehu Abhaya Vardaan.
|| Chalisa ||
Shri Girijapati Deen Dayala.
Sada Karat Santan Pratipala.
Bhaal Chandrama Sohat Neeke.
Kaanan Kundal Naag Phani Ke.
Ang Gaur Shir Gang Bahaye.
Mund Maal Tan Chhor Lagaye.
Vastra Khaal Baghambar Sohe.
Chhavi Ko Dekhi Naag Mun Mohe.
Maina Maatu Ki Havey Dulaari.
Baam Ang Sohat Chhabi Nyaari.
Kar Trishul Sohat Chhavi Bhaari.
Karat Sada Shatrun Shay Kaari.
Nandi Ganesh Sohai Tahan Kaise.
Sagar Madhya Kamal Hain Jaise.
Kartik Shyam Aur Gana Raau.
Ya Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kaau.
Devan Jab Hee Jayen Pukara.
Tabahin Dukh Prabhu Ap Nivara.
Kiya Upadrava Taarak Bhaari.
Devan Sab Mili Tumhi Juhaari.
Turat Shadanan Aap Pathayo.
Luv Nimesh Maham Maari Girayau.
Ap Jallandhar Asur Sanhara.
Suyash Tumhaar Vidit Sansara.
Tripurasur Sang Yuddha Machayi.
Sabahin Kripa Kar Leen Bachayi.
Keeya Tap Bhagirath Bhari.
Purab Pratigya Taasu Purari.
Daanin Maham Tum Sam Kou Naahi.
Sewak Astuti Karat Sadahin.
Veda Nam Mahima Tum Gayee.
Akath Anaadi Bhed Nahin Paayee.
Prakati Udadhi Manthan Mein Jwala.
Jarat Surasur Bhaye Vihala.
Kinha Daya Tahan Kari Sahayee.
Nilakantha Tab Nam Kahayee.
Poojan Ramchandra Jab Keenha.
Jeet Le Lank Vibhishan Deenha.
Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhaari.
Keenha Pareeksha Tabahin Puraari.
Ek Kamal Prabhu Raakheu Joyee.
Kamal Nayan Poojan Chahan Soyee.
Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar.
Bhaye Prasanna Diye Icchhit Var.
Jai Jai Jai Ananta Avinashi.
Karat Kripa Sab Ke Ghatvaasi.
Dushta Sakal Nit Mohi Sataave.
Bharamat Rahe Mohi Chain Na Aaven.
Traahi Traahi Main Naath Pukaaro.
Yahi Avsar Mohi Aan Ubaaro.
Lai Trishul Shatrun Ko Maro.
Sankat Se Mohin Ana Ubaro.
Maatu Pita Bhrata Sab Koi.
Sankat Mein Poochat Nahi Koi.
Swami Ek Hai Aas Tumhaari.
Aayei Harhu Ab Sankat Bhaari.
Dhan Nirdhan Ko Det Sadaheen.
Jo Koi Jaanche Wo Phal Paahin.
Astuti Kehi Vidhi Karoun Tumhaari.
Shamhunath Ab Chook Hamari.
Shankar Ho Sankat Ke Naashan.
Mangal Kaaran Vighna Vinaashan.
Yogi Yati Muni Dhyan Lagaave.
Narad Shaarad Sheesh Navaaven.
Namo Namo Jai Namah Shivaya.
Sur Brahmadik Par Na Paya.
Jo Yeh Paath Kare Man Laayee.
Ta Par Hot Hain Shambhu Sahaayee.
Riniya Jo Koi Ho Adhikari.
Paath Kare So Paawan Haari.
Putra Hon Ki Iccha Joi.
Nishchay Shiv Prasad Tehi Hoi.
Pandit Trayodashi Ko Laave.
Dhyan Poorvak Hom Karaave.
Trayodashi Vrat Karai Hamesha.
Tan Nahi Taakey Rahe Kalesha.
Dhoop Deep Naivedya Chadhaave.
Shankar Sammukha Paath Sunaave.
Janm Janm Ke Paap Nasaavein.
Anta Vasa Shivapur Men Pavain.
|| Doha ||
Kahai Ayodhya Asha Tumhari.
Jaani Sakal Dukh Harhu Hamari.
शिव चालीसा का महत्व – Shiv Chalisa Meaning & Significance
"जय गिरिजापति दीन दयाला, सदा करत संतन प्रतिपाला" — भगवान शिव को गिरिजापति अर्थात पार्वती के पति के रूप में संबोधित किया गया है। वे दीन-दुखियों पर दया करने वाले और सदा अपने भक्तों की रक्षा करने वाले हैं।"नीलकंठ तब नाम कहाई" — समुद्र मंथन में निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने स्वयं पीकर देवताओं और असुरों की रक्षा की। विष कंठ में ही रोक लेने से उनका कंठ नीला पड़ गया और तभी से वे "नीलकंठ" कहलाए। यह प्रसंग उनकी असीम करुणा और त्याग का प्रतीक है।
"जो यह पाठ करे मन लाई, ता पर होत हैं शम्भु सहाई" — शिव चालीसा का यह फल-श्रुति वाला छंद बताता है कि जो भी भक्त मन लगाकर इस चालीसा का पाठ करता है, उस पर भगवान शंकर की विशेष कृपा होती है।
"त्रयोदशी व्रत करे हमेशा, तन नहीं ताके रहे कलेशा" — प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) के दिन शिव चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन नियमित पाठ करने वाले भक्त के शरीर और मन से सभी कष्ट दूर होते हैं।
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