जब अपनी नैया खुद से न संभले, जब हर तरफ से रास्ता बंद लगे और कोई सहारा नज़र न आए — तब भक्त के होंठों से सिर्फ एक ही नाम निकलता है, और वो है जगन्नाथ। Pujya Shri Indresh Ji Maharaj के स्वर में "जगन्नाथ, जगन्नाथ! चक्का नैन नीलांचल वारे" सुनते ही मन पूर्ण समर्पण के उस भाव में डूब जाता है जहाँ अब कोई शर्त नहीं, कोई हिसाब नहीं — सिर्फ शरणागति है। यह भजन भगवान जगन्नाथ को नीलांचल (पुरी) के निवासी, चक्र-नयन और भक्त-वत्सल स्वरूप में पुकारता है — वही जो रथयात्रा में सबके साथ निकलते हैं और हर भक्त की डूबती नैया को पार लगाते हैं।
"मेरी ये नैया है अब तो तेरे हवाले" — जीवन की नाव अब पूरी तरह भगवान के हाथों में सौंप दी गई है। यही शरणागति का सच्चा भाव है — बिना शर्त, बिना संकोच।
"तुझे छोड़ जाऊँ मैं अब किसके द्वारे" — भक्त खुद से सवाल करता है: जगन्नाथ को छोड़कर और किसके दर पर जाए? यह प्रश्न भक्ति की उस गहराई को दिखाता है जहाँ कोई और विकल्प ही नहीं बचता।
"जगन्नाथ स्वामी मेरे नैन के तारे, मेरे सारे काज स्वामी आप सँवारें" — भगवान को आँखों का तारा कहकर भक्त यह स्वीकार करता है कि उसके जीवन के सारे काम, सारी जिम्मेदारियाँ अब प्रभु की कृपा पर ही निर्भर हैं।
यह भजन विशेष रूप से रथयात्रा महोत्सव, पुरी जगन्नाथ मंदिर की भजन संध्याओं, और संकट के समय व्यक्तिगत प्रार्थना में गाया जाता है। इस्कॉन मंदिरों और वैष्णव सत्संगों में भी इसे श्रद्धा से गाया जाता है।
🙏 जय जगन्नाथ! जय जय जगन्नाथ! 🙏
🎵 SONG DETAILS
भजन का नाम — जगन्नाथ, जगन्नाथ! चक्का नैन नीलांचल वारे
By — Pujya Shri Indresh Ji Maharaj
Channel — BhaktiPath
Lyrics — Traditional
देवता — भगवान श्री जगन्नाथ (नीलांचल वासी)
थीम — जगन्नाथ भक्ति | पूर्ण शरणागति | रथयात्रा भजन
भजन का नाम — जगन्नाथ, जगन्नाथ! चक्का नैन नीलांचल वारे
By — Pujya Shri Indresh Ji Maharaj
Channel — BhaktiPath
Lyrics — Traditional
देवता — भगवान श्री जगन्नाथ (नीलांचल वासी)
थीम — जगन्नाथ भक्ति | पूर्ण शरणागति | रथयात्रा भजन
जगन्नाथ चक्का नैन नीलांचल वारे — Lyrics in Hindi
॥ मुखड़ा ॥
जगन्नाथ, जगन्नाथ!
चक्का नैन, चक्का नैन, नीलांचल वारे,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ! जगन्नाथ!
॥ अंतरा १ ॥
मेरी ये नैया है अब तो तेरे हवाले,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ! जगन्नाथ!
तुझे छोड़ जाऊँ मैं अब किसके द्वारे,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ! जगन्नाथ!
॥ अंतरा २ ॥
जगन्नाथ स्वामी मेरे नैन के तारे,
मेरे सारे काज स्वामी आप सँवारें,
जगन्नाथ! जगन्नाथ!
चक्का नैन, चक्का नैन, नीलांचल वारे,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ!
Jagannath Chaka Nain Lilachal Vare — Lyrics in English (Roman / Hinglish)
|| Mukhda ||
Jagannath, Jagannath!
Chakka nain, chakka nain, Nilanchal vaare,
Tu na sambhaale to humein kaun sambhaale,
Jagannath! Jagannath!
|| Antara 1 ||
Meri ye naiya hai ab to tere hawaale,
Tu na sambhaale to humein kaun sambhaale,
Jagannath! Jagannath!
Tujhe chhod jaaun main ab kiske dwaare,
Tu na sambhaale to humein kaun sambhaale,
Jagannath! Jagannath!
|| Antara 2 ||
Jagannath swami mere nain ke taare,
Mere saare kaaj swami aap sanvaare,
Jagannath! Jagannath!
Chakka nain, chakka nain, Nilanchal vaare,
Tu na sambhaale to humein kaun sambhaale,
Jagannath!
भजन का अर्थ – Jagannath Chaka Nain Lilachal Vare Meaning
"तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले" — इस भजन की सबसे गहरी पंक्ति। भक्त मान लेता है कि संसार में और कोई सहारा नहीं — सिर्फ जगन्नाथ ही उसकी डूबती नैया को थाम सकते हैं।"मेरी ये नैया है अब तो तेरे हवाले" — जीवन की नाव अब पूरी तरह भगवान के हाथों में सौंप दी गई है। यही शरणागति का सच्चा भाव है — बिना शर्त, बिना संकोच।
"तुझे छोड़ जाऊँ मैं अब किसके द्वारे" — भक्त खुद से सवाल करता है: जगन्नाथ को छोड़कर और किसके दर पर जाए? यह प्रश्न भक्ति की उस गहराई को दिखाता है जहाँ कोई और विकल्प ही नहीं बचता।
"जगन्नाथ स्वामी मेरे नैन के तारे, मेरे सारे काज स्वामी आप सँवारें" — भगवान को आँखों का तारा कहकर भक्त यह स्वीकार करता है कि उसके जीवन के सारे काम, सारी जिम्मेदारियाँ अब प्रभु की कृपा पर ही निर्भर हैं।
यह भजन विशेष रूप से रथयात्रा महोत्सव, पुरी जगन्नाथ मंदिर की भजन संध्याओं, और संकट के समय व्यक्तिगत प्रार्थना में गाया जाता है। इस्कॉन मंदिरों और वैष्णव सत्संगों में भी इसे श्रद्धा से गाया जाता है।
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