कभी-कभी एक नज़र ही काफी होती है — बस एक नज़र, और सब कुछ बदल जाता है। Nikhil Verma की आवाज़ में "श्याम से नजरें मिली हैं" सुनते वक्त ठीक यही होता है। Kshl Music के सुरीले संगीत के साथ T-Series ने इस भजन को February 2026 में release किया — और यह भजन उन सभी भक्तों के दिल की बात कहता है जो एक बार श्याम की नज़र में आ गए, फिर कहीं और जा ही नहीं सके। यह भजन प्रेम और भक्ति का वो अनोखा संगम है जो सुनते ही मन वृन्दावन की गलियों में खो जाता है।
SONG DETAILS
Singer - Nikhil Verma
Lyrics - Nikhil Verma
Music - Nikhil Verma & Kshl Music
Label - T-Series
॥ मुखड़ा ॥
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं फिर उनसे मिलने की चाहत की है फिर उनसे मिलने की चाहत की है दिल ही नहीं भरता है मैं क्या करूं
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं
॥ अंतरा १ ॥
मैं जब भी श्री राधा गाऊं तुम दौड़े आते हो और समझ कुछ आए नहीं कि तुम ही तुम भाते हो सबकी अपनी दुनिया है मेरी दुनिया तुम कान्हा इस दुनिया में राधा संग मेरे मोहन बस जाना
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं फिर उनसे मिलने की चाहत की है दिल ही नहीं भरता है मैं क्या करूं
॥ अंतरा २ ॥
सारे दुख और दर्द हमारे पल में सब मिट जाते ओ मोहन तेरी सूरत ने दीवाना कर डाला तेरी मुरली की तान सुनूं मैं बावरी हो जाती मेरा मन यह भटका फिरे तेरे बिन हर पल घबराती
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं फिर उनसे मिलने की चाहत की है दिल ही नहीं भरता है मैं क्या करूं
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun Phir unse milne ki chaahat ki hai Phir unse milne ki chaahat ki hai Dil hi nahi bharta hai main kya karun
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun
Main jab bhi shri radha gaun tum daude aate ho Aur samajh kuch aaye nahi ki tum hi tum bhaate ho Sabki apni duniya hai meri duniya tum kanha Is duniya mein radha sang mere mohan bas jaana
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun Phir unse milne ki chaahat ki hai Dil hi nahi bharta hai main kya karun
Saare dukh aur dard hamaare pal mein sab mit jaate O mohan teri soorat ne deewana kar daala Teri murli ki taan sunun main baavri ho jaati Mera mann yeh bhatka phire tere bin har pal ghabraati
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun Phir unse milne ki chaahat ki hai Dil hi nahi bharta hai main kya karun
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun
"जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं, कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं" → यह पंक्ति उस अवस्था को बयान करती है जब भक्त पहली बार कान्हा की नज़र में आता है — फिर उसे कुछ और नहीं सूझता। यह भक्ति का पहला चरण है — जब मन श्याम में डूब जाता है।
"मैं जब भी श्री राधा गाऊं तुम दौड़े आते हो" → कितना सुंदर भाव है — राधा रानी का नाम लेते ही कान्हा दौड़े चले आते हैं। यह राधा-कृष्ण के अनंत प्रेम का वो रहस्य है जो हर भक्त जानता है।
"सारे दुख और दर्द हमारे पल में सब मिट जाते, ओ मोहन तेरी सूरत ने दीवाना कर डाला" → कान्हा के दर्शन मात्र से सारे दुख पल में मिट जाते हैं — यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, यह हर सच्चे भक्त का अनुभव है।
"तेरी मुरली की तान सुनूं मैं बावरी हो जाती" → मुरली की धुन — जो एक बार कानों में पड़ जाए, फिर छूटती नहीं। भक्त कहता है — तेरी बांसुरी सुनकर मैं पागल हो जाती हूँ।
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Singer - Nikhil Verma
Lyrics - Nikhil Verma
Music - Nikhil Verma & Kshl Music
Label - T-Series
श्याम से नजरें मिली हैं Lyrics in Hindi
॥ मुखड़ा ॥
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं फिर उनसे मिलने की चाहत की है फिर उनसे मिलने की चाहत की है दिल ही नहीं भरता है मैं क्या करूं
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं
॥ अंतरा १ ॥
मैं जब भी श्री राधा गाऊं तुम दौड़े आते हो और समझ कुछ आए नहीं कि तुम ही तुम भाते हो सबकी अपनी दुनिया है मेरी दुनिया तुम कान्हा इस दुनिया में राधा संग मेरे मोहन बस जाना
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं फिर उनसे मिलने की चाहत की है दिल ही नहीं भरता है मैं क्या करूं
॥ अंतरा २ ॥
सारे दुख और दर्द हमारे पल में सब मिट जाते ओ मोहन तेरी सूरत ने दीवाना कर डाला तेरी मुरली की तान सुनूं मैं बावरी हो जाती मेरा मन यह भटका फिरे तेरे बिन हर पल घबराती
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं फिर उनसे मिलने की चाहत की है दिल ही नहीं भरता है मैं क्या करूं
जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं
Shyam Se Nazrein Mili Hain Lyrics in English (Roman)
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun Phir unse milne ki chaahat ki hai Phir unse milne ki chaahat ki hai Dil hi nahi bharta hai main kya karun
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun
Main jab bhi shri radha gaun tum daude aate ho Aur samajh kuch aaye nahi ki tum hi tum bhaate ho Sabki apni duniya hai meri duniya tum kanha Is duniya mein radha sang mere mohan bas jaana
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun Phir unse milne ki chaahat ki hai Dil hi nahi bharta hai main kya karun
Saare dukh aur dard hamaare pal mein sab mit jaate O mohan teri soorat ne deewana kar daala Teri murli ki taan sunun main baavri ho jaati Mera mann yeh bhatka phire tere bin har pal ghabraati
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun Phir unse milne ki chaahat ki hai Dil hi nahi bharta hai main kya karun
Jab se meri shyam se nazrein mili hain Jab se meri shyam se nazrein mili hain Kuch na samajh mein aaye main kya karun
भजन का अर्थ – Shyam Se Nazrein Mili Hain Meaning
"जब से मेरी श्याम से नजरें मिली हैं, कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं" → यह पंक्ति उस अवस्था को बयान करती है जब भक्त पहली बार कान्हा की नज़र में आता है — फिर उसे कुछ और नहीं सूझता। यह भक्ति का पहला चरण है — जब मन श्याम में डूब जाता है।
"मैं जब भी श्री राधा गाऊं तुम दौड़े आते हो" → कितना सुंदर भाव है — राधा रानी का नाम लेते ही कान्हा दौड़े चले आते हैं। यह राधा-कृष्ण के अनंत प्रेम का वो रहस्य है जो हर भक्त जानता है।
"सारे दुख और दर्द हमारे पल में सब मिट जाते, ओ मोहन तेरी सूरत ने दीवाना कर डाला" → कान्हा के दर्शन मात्र से सारे दुख पल में मिट जाते हैं — यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, यह हर सच्चे भक्त का अनुभव है।
"तेरी मुरली की तान सुनूं मैं बावरी हो जाती" → मुरली की धुन — जो एक बार कानों में पड़ जाए, फिर छूटती नहीं। भक्त कहता है — तेरी बांसुरी सुनकर मैं पागल हो जाती हूँ।
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