Shree Vishnu Chalisa Lyrics | Hindi English | गुरुवार स्पेशल

गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है — वही विष्णु जिन्होंने हर युग में, हर संकट में अवतार लेकर सृष्टि की रक्षा की। श्री विष्णु चालीसा उन्हीं के अनंत रूपों, अवतारों और भक्त-वत्सल स्वभाव की स्तुति है — वाराह, मत्स्य, कूर्म और मोहिनी जैसे अवतारों से लेकर ध्रुव-प्रह्लाद जैसे भक्तों को संकट से उबारने तक, हर चौपाई में उनकी करुणा झलकती है।
🙏 जय श्री हरि विष्णु! जय नारायण! 🙏
🎵 SONG DETAILS

भजन का नाम — श्री विष्णु चालीसा
By — Anuradha Paudwal
Channel — T-Series Bhakti Sagar
Lyrics — Traditional
देवता — भगवान श्री विष्णु (जगत के पालनहार)
थीम — विष्णु चालीसा | गुरुवार भक्ति | संकटमोचन स्तुति
Shree Vishnu Chalisa Lyrics in Hindi - Guruwar Special

श्री विष्णु चालीसा — Lyrics in Hindi

॥ दोहा ॥ विष्णु सुनिए विनय, सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करूँ, दीजै ज्ञान बताय॥ ॥ चौपाई ॥ नमो विष्णु भगवान खरारी। कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥ प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी। त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥ सुन्दर रूप मनोहर सूरत। सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥ तन पर पीताम्बर अति सोहत। बैजन्ती माला मन मोहत॥ शंख चक्र कर गदा बिराजे। देखत दैत्य असुर दल भाजे॥ सत्य धर्म मद लोभ न गाजे। काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥ सन्तभक्त सज्जन मनरंजन। दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥ सुख उपजाय कष्ट सब भंजन। दोष मिटाय करत जन सज्जन॥ पाप काट भव सिन्धु उतारण। कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥ करत अनेक रूप प्रभु धारण। केवल आप भक्ति के कारण॥ धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा। तब तुम रूप राम का धारा॥ भार उतार असुर दल मारा। रावण आदिक को संहारा॥ आप वाराह रूप बनाया। हरण्याक्ष को मार गिराया॥ धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया। चौदह रतनन को निकलाया॥ अमिलख असुरन द्वन्द मचाया। रूप मोहनी आप दिखाया॥ देवन को अमृत पान कराया। असुरन को छवि से बहलाया॥ कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया। मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया॥ शंकर का तुम फन्द छुड़ाया। भस्मासुर को रूप दिखाया॥ वेदन को जब असुर डुबाया। कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया॥ मोहित बनकर खलहि नचाया। उसही कर से भस्म कराया॥ असुर जलन्धर अति बलदाई। शंकर से उन कीन्ह लड़ाई॥ हार पार शिव सकल बनाई। कीन सती से छल खल जाई॥ सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी। बतलाई सब विपत कहानी॥ तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी। वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥ देखत तीन दनुज शैतानी। वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥ हो स्पर्श धर्म क्षति मानी। हना असुर उर शिव शैतानी॥ तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे। हिरणाकुश आदिक खल मारे॥ गणिका और अजामिल तारे। बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥ हरहु सकल संताप हमारे। कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥ देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे। दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥ चाहता आपका सेवक दर्शन। करहु दया अपनी मधुसूदन॥ जानूं नहीं योग्य जब पूजन। होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥ शीलदया सन्तोष सुलक्षण। विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥ करहुं आपका किस विधि पूजन। कुमति विलोक होत दुख भीषण॥ करहुं प्रणाम कौन विधि सुमिरण। कौन भांति मैं करहु समर्पण॥ सुर मुनि करत सदा सेवकाई। हर्षित रहत परम गति पाई॥ दीन दुखिन पर सदा सहाई। निज जन जान लेव अपनाई॥ पाप दोष संताप नशाओ। भव बन्धन से मुक्त कराओ॥ सुत सम्पति दे सुख उपजाओ। निज चरनन का दास बनाओ॥ निगम सदा ये विनय सुनावै। पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥ ॥ दोहा ॥ भक्त हृदय में वास करें, पूर्ण कीजिये काज। शंख चक्र और गदा पद्म, हे विष्णु महाराज॥

Shree Vishnu Chalisa — Lyrics in English (Roman / Hinglish)

|| Doha || Vishnu suniye vinay, sevak ki chit lay, Keerat kuchh varnan karoon, deejai gyaan bataay. || Chaupai || Namo Vishnu Bhagwan Kharaari, kasht nashaavan akhil bihaari, Prabal jagat mein shakti tumhaari, tribhuvan phail rahi ujiyaari. Sundar roop manohar soorat, saral swabhaav mohini moorat, Tan par peetambar ati sohat, baijanti mala man mohat. Shankh chakra kar gada biraaje, dekhat daitya asur dal bhaaje, Satya dharm mad lobh na gaaje, kaam krodh mad lobh na chhaaje. Sant bhakt sajjan manranjan, danuj asur dushtan dal ganjan, Sukh upajaay kasht sab bhanjan, dosh mitaay karat jan sajjan. Paap kaat bhav sindhu utaaran, kasht naashkar bhakt ubaaran, Karat anek roop prabhu dhaaran, keval aap bhakti ke kaaran. Dharni dhenu ban tumhein pukaara, tab tum roop Ram ka dhaara, Bhaar utaar asur dal maara, Ravan aadik ko sanhaara. Aap Varaah roop banaaya, Hiranyaaksh ko maar giraaya, Dhar Matsya tan sindhu banaaya, chaudah ratnan ko nikalaaya. Amilakh asuran dwand machaaya, roop Mohini aap dikhaaya, Devan ko amrit paan karaaya, asuran ko chhavi se bahlaaya. Kurma roop dhar sindhu majhaaya, Mandraachal giri turat uthaaya, Shankar ka tum phand chhudaaya, Bhasmasur ko roop dikhaaya. Vedan ko jab asur dubaaya, kar prabandh unhein dhudhwaaya, Mohit bankar khalahi nachaaya, usahi kar se bhasm karaaya. Asur Jalandhar ati baldaai, Shankar se un keenh ladaai, Haar paar Shiv sakal banaai, keen Sati se chhal khal jaai. Sumiran keen tumhein Shivraani, batlaai sab vipat kahaani, Tab tum bane muneeshwar gyani, Vrinda ki sab surati bhulaani. Dekhat teen danuj shaitaani, Vrinda aay tumhein laptaani, Ho sparsh dharm kshati maani, hana asur ur Shiv shaitaani. Tumne Dhruv Prahlad ubaare, Hiranyakashyap aadik khal maare, Ganika aur Ajaamil taare, bahut bhakt bhav sindhu utaare. Harahu sakal santaap hamaare, kripa karahu Hari sirjanhaare, Dekhahu main nij darash tumhaare, deen bandhu bhaktan hitkaare. Chahta aapka sevak darshan, karahu daya apni Madhusudan, Jaanoon nahin yogya jab poojan, hoy yagya stuti anumodan. Sheel daya santosh sulakshan, vidit nahin vratbodh vilakshan, Karahun aapka kis vidhi poojan, kumati vilok hot dukh bheeshan. Karahun pranaam kaun vidhi sumiran, kaun bhaanti main karahu samarpan, Sur muni karat sada sevakaai, harshit rahat param gati paai. Deen dukhin par sada sahaai, nij jan jaan lev apnaai, Paap dosh santaap nashaao, bhav bandhan se mukt karaao. Sut sampati de sukh upjaao, nij charanan ka daas banaao, Nigam sada ye vinay sunaavai, padhai sunai so jan sukh paavai. || Doha || Bhakt hriday mein vaas karein, poorn keejiye kaaj, Shankh chakra aur gada padma, he Vishnu Maharaj.

चालीसा का अर्थ – Shree Vishnu Chalisa Meaning

प्रारंभ का दोहा एक विनम्र प्रार्थना है — भक्त भगवान से अपने ज्ञान की सीमितता स्वीकार करते हुए विष्णु जी की महिमा वर्णन करने की अनुमति और मार्गदर्शन मांगता है।

आगे की चौपाइयों में भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप का वर्णन है — शंख, चक्र, गदा धारण किए, पीताम्बर और बैजन्ती माला में सुशोभित, जिन्हें देखते ही असुरों की सेना भाग खड़ी होती है।

चालीसा में विष्णु जी के प्रमुख अवतारों का स्मरण है — वाराह अवतार में हिरण्याक्ष का वध कर धरती को बचाया, मत्स्य रूप में प्रलय से चौदह रत्नों की रक्षा की, मोहिनी रूप धरकर समुद्र-मंथन के अमृत को देवताओं तक पहुंचाया, और कूर्म रूप में मंदराचल पर्वत को थामकर मंथन को संभव बनाया।

"तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे" — यह पंक्ति स्मरण कराती है कि विष्णु जी ने हमेशा अपने सच्चे भक्तों को हर युग में संकट से उबारा है, चाहे बालक ध्रुव हों या भक्त प्रह्लाद।

अंतिम चौपाइयों में भक्त विनती करता है कि उसके सारे संताप दूर हों, उसे भगवान के दर्शन प्राप्त हों, और वह सदा प्रभु के चरणों का दास बना रहे।

यह चालीसा विशेष रूप से गुरुवार के दिन, एकादशी व्रत के समय, और घर में सुख-समृद्धि के लिए नियमित भक्ति-पाठ के रूप में गाई जाती है।

श्री विष्णु चालीसा — Anuradha Paudwal | Video

निष्कर्ष

श्री विष्णु चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ भक्त के जीवन से संताप हरकर उसे जगत के पालनहार की कृपा-छाया में ले आता है। गुरुवार के इस पावन दिन इसे नियमित पढ़ें और अपने परिवार व विष्णु भक्तों के साथ ज़रूर share करें। 🙏 जय श्री हरि! जय नारायण! 🙏